Blogvani

Saturday, May 9, 2009

ज़िन्दगी…

ऐ ज़िन्दगी तू मुझसे मिलने आती क्यों नहीं?
मेरी तन्हाई को हमराह बनाती क्यों नहीं?

कि हमने भी मुस्कुराने का मौका दिया है, लोगो को,
रूठ के जाने को, तू फिर आती क्यों नहीं?

इस रिश्ते कि कब्र पर चढाया था, एक फूल मैंने भी,
तू आखरी सलाम देने, आती क्यों नहीं?

रस्म-ऐ-मोहब्बत है, रूठने मनाने कि,
तू इस रस्म को तोड़ने फिर आती क्यों नहीं?

तेरे दीदार को अटकी है, आखरी साँस मेरी,
इस साँस को तोड़ने तू आती क्यों नहीं?

तेरे बिस्तर मैं छुपे हुए कुछ, मेरे प्यार के आँसू,
उन आँसुओ को सुखाने, आती क्यों नहीं?

बच गया है मेरा जो अक्स, तेरे दिल के किसी कोने में,
उस अक्स को मिटाने अब आती क्यों नहीं?
ऐ ज़िन्दगी तू मुझसे मिलने आती क्यों नहीं?
मेरी तन्हाई को हमराह बनाती क्यों नहीं?

11 comments:

चंदन कुमार झा said...

सुन्दर रचना.

चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

गुलमोहर का फूल

SWAPN said...

sunder rachna ke liye badhai. blog jagat men swagat.

दिगम्बर नासवा said...

तेरे बिस्तर मैं छुपे हुए कुछ, मेरे प्यार के आँसू,
उन आँसुओ को सुखाने, आती क्यों नहीं?

लाजवाब शेर..........खूबसूरत ग़ज़ल
स्वागत है आपका इस जगत में

खूब हैं आपके जज्बात लिखते रहें

प्रकाश गोविन्द said...

badhiya hai bhaayi

likhte rahiye


shubh kamnayen

श्याम सखा 'श्याम' said...

रूठने मनाने कि,
तू इस रस्म.....अच्छी कहन है
गज़लों हेतु


http://gazalkbahane.blogspot.com/ कम से कम दो गज़ल [वज्न सहित] हर सप्ताह
http:/katha-kavita.blogspot.com/ दो छंद मुक्त कविता हर सप्ताह कभी-कभी लघु-कथा या कथा का छौंक भी मिलेगा
सस्नेह
श्यामसखा‘श्याम

नारदमुनि said...

sundar . narayan narayan

ड़ा.योगेन्द्र मणि कौशिक said...

अच्छी रचना है ।

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Rahul Purohit said...

Thanks Everybody.
Thanks for ur comment.
I'll try to come with some good one.

MAYUR said...

इस साँस को तोड़ने तू आती क्यों नहीं? तेरे बिस्तर मैं छुपे हुए कुछ, मेरे प्यार के आँसू,

जान बस्ती है इन पंक्तियों मैं
अपनी अपनी डगर

arjun said...

bahut achacha!!!