Blogvani

Sunday, February 28, 2010

क्या लिखूं...

क्या लिखूं,
आतंकवाद की कोई वेदना को व्यक्त करूँ,
या बंटते भारत की व्यथा लिखूं.
मंदिर की आरती या मस्जिद की अजान लिखूं.
बूढ़े माँ बाप की भीगी पलकों का इंतजार या बच्चे की मधुर मुस्कान लिखूं,
फिर से नया कोई प्रेम गीत लिखूं.
या ये सब बहाने है विषय तलाशने के, अपनी असहाय पड़ती कलम को छिपाने के,
क्योंकि
मेरे भाव अब खत्म हो गए हैं,
चलती फिरती लाशों के बीच में,
मैं मर गया हूँ और,
मेरी संवेदनाएं अपना वजूद तलाश रही है…

4 comments:

वन्दना अवस्थी दुबे said...

होली की बहुत-बहुत शुभकामनायें.

Kuldeep Saini said...

bahut khoob likha maza aa gaya

Kuldeep Saini said...
This comment has been removed by the author.
Anonymous said...

nice one